क्या भगवान शिव वास्तव में न-शा करते थे ?

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जी नही यह सिर्फ अफ़वाह है ,जो अज्ञानता के कारण स्वंय हिंदूओ में भी फैली है ।

क्यों नही न-शा करते थे –

शिव कोई इंसान नही जो कोई न-शीली वस्तु का सेवन करे वो इन सब से परे है , इस ब्रह्मांड में सिर्फ 2 चीजे है समय और स्पेस शिव इस ब्रह्मांड में इन दोनों का प्रतिनिधित्व अपने अलग अलग स्वरूप से करते है ।

शिव अंत के देव के रूप में पूजा जाता है ,और अंत स्वयं निर्भर है समय पर यानी काल पर ,और शिव इस काल की सत्ता का प्रतीक है और लोग उन्हें महाकाल भी कहते है क्योंकि हिंदूओ का मानना है इस काल यानी समय के ऊपर भी कोई सत्ता है ।

शिव को नटराज भी कहते है शिव तो नृत्य के प्रतीक है उन्होंने तो नृत्य को जन्म दिया लेकिन

कैसे शिव ने नृत्य को जन्म दिया

नृत्य है क्या ? समय के साथ एक लय में गतिविधि करना ही नृत्य है ।

महाविस्फोट के बाद से यह पूरा ब्रह्मांड एक लय में समय के साथ गति कर रहा है , और। सब कुछ एक मंझे हुए नर्तक की भांति हो रहा है और खगोलशास्त्र का कहना है कि ब्रह्मांड का विस्तार अभी भी हो रहा है , हर वक्त घूमता यह ब्रह्मांड ही शिव का नृत्य है ।

फिर क्यों चढ़ता है शिव को न-शीले पदार्थ

शिव को हलाहल वि-ष पीने की कहानी है ,जहाँ शिव ने संसार के कष्ट यानि ज-हर को पी लिया और संसार को वि-षमुक्त कर दिया

अब जब कोई भक्त शिव को न-शा वाली वास्तु चढ़ता है तो वह सांकेतिक रूप से शिव से कहता है कि – हे देव जिस तरह आप ने उस ज-हर को पीकर धरती को वि-षमुक्त किया वैसे ही मेरे भी वि-ष को स्वीकार कर मुझे वि-षमुक्त कर दो ।

आप मे कौन से वि-ष है ? लोभ ,काम ,स्वार्थ, घमंड आदि

क्या शिव वि-षमुक्त करते है –

बिल्कुल आप के जीवन के सारे कष्ट समय यानी काल के साथ ही तो जाते आप की कुंठा, दुख , दर्द ,को काल ही तो दूर करता है ।

शिव तो ब्रह्मांडीय शक्ति है उनके बिना तो कुछ है ही नही ना उनसे पहले कुछ था ,ना उनके बाद कुछ होगा ।

हर हर महादेव